कड़ी धूप में छाओं जैसी बातें करतें हैं आंसू भी तो माओं जैसी बातें करतें हैं
रास्ता देखने वाली आँखों के अन्होने ख़्वाब
प्यास में भी दरयाओं जैसी बातें करते हैं
खुद को बिखरता देखते हैं कुछ कर नहीं पातें हैं
फिर भी लोग खुदाओं जैसी बातें करतें हैं
एक ज़रा सी जोत के बल पर अंधियारों से बैर
पागल दिए हवाओं जैसी बातें करें हैं